Biography of Ramkumar Verma | राम कुमार वर्मा जी जीवन परिचय

Ramkumar Verma Ka Jivan Parichy | Ramkumar Verma Jivan Parichy In hindi | राम कुमार वर्मा जी जीवन परिचय | राम कुमार वर्मा जी की जीवनी

डॉक्टर राम कुमार वर्मा का जन्म मध्यप्रदेश के सागर जिले में 15 सितंबर सन हुआ था। के पिता श्री लक्ष्मी प्रसाद वर्मा मध्य प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश में यंग विश्वविद्यालय से हिंदी में हमें की परीक्षा प्रथम श्रेणी में तीन की ओर से प्रथम स्थान प्राप्त किया।

राम कुमार वर्मा जी जीवन परिचय | Biography of Ramkumar Verma

नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास विषय पर पीएचडी की उपाधि से सम्मानित हुए। राम कुमार मारे एक वर्षों तक प्रयाग विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में प्राध्यापक और फिर विभाग अध्यक्ष रहे। सन विदेश में भी हिंदी शिक्षण कार्य किया था। सी एस एस मास्को में भी हिंदी के प्रोफेसर रहे और श्रीलंका में भारतीय साहित्य और संस्कृति का प्रसार कार्य किया। भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण की उपाधि से सम्मानित किया है पर माँ जी का देहावसान 5 अक्टूबर सन् को प्रयाग।मैं ह

रचना Ramkumar Verma

डॉक्टर राम कुमार वर्मा के प्रमुख ने कहा कि संग्रह निम्नलिखित है -पृथ्वीराज की आंखें, चारू मित्रा, देश मिठाई, किरण, को मोदी महोत्सव, दीपदान, रजत रश्मि, रिमझिम, विभूति।

फरमा जितनी रचनात्मक प्रतिभा बहुमुखी हैं हिंदी छह वाली धारा के सुप्रसिद्ध कवि, नाटककार। और समालोचक थे। देख अभी और समालोचक की अपेक्षा नाटककार, विशेष रूप सेएकांकीकार के रूप में अधिक लोकप्रिय और ऐतिहासिक सभी विषयों पर एकांकी, लिखे है, किंतुऐतिहासिक एकांकी कार के रूप में उनकी प्रतिष्ठा अद्वितीय है।

ओके कहा क्यों मैं इतिहासिक इतिवृत्त प्रधान नहीं बल्कि ऐतिहासिक परिवेश में मानवीय संवेदना का उद्घाटन हुआ है। सी कभी मैं तो थी के साथ साथ कल्पना का समन्वय होने पर भी इतिहास का मूल रूपसिक्त नहीं होने पाया है। सी सी चरित्र-चित्रण में वर्मा जी केदृष्टिकोण आदर्शवादी है।

साहित्यिक परिचय Ramkumar Verma

साहित्यिक अवदान वर्मा जी के के ध्वनि रूपक समय समय पर आकाशवाणी से सफलतापूर्वक प्रकाशित किए जाते रहे हैं। विश्वविद्यालय समारोह मैं अभिनय व्यवस्था में वर्मा जी ने अपना विशेष योगदान दिया।

सी रंगमंच दृष्टि से बदल की मृत्यु एकाकी उन्होंने सन 1930 मेंलिखा। ज्योति सफल हुआ। ये है कहा कि आज भी फैंटसी एकांकियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। उनके कहा क्यों में मनोभावों का सूक्ष्म चित्रण किया गया है सामाजिक एकांकियों में हाशिया एवं व्यंग्य की स्पष्ट झलक मीलती है। उनके ऐतिहासिक एकांकी उनकी आदर्शवादी दृष्टि के लिए प्रसिद्ध है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.