Biography of Professor Ji Sundar Reddy | प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी जीवन परिचय

Professor Ji Sundar Reddy Ka Jivan Parichy | Professor Ji Sundar Reddy Ka Sahityk Parichy | प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी जीवन परिचय | प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की जीवनी

हिंदी भाषी हिंदी लेख को मैं प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी का महत्वपूर्ण स्थान है। वे उत्कृष्ट निबंधकार एवं श्रेष्ठ समालोचक के रूप में हिंदी जगत में जाने जाते हैं। मूल्य तय तेलुगु भाषी प्रोफेसर रेड्डी ने हिंदी और तेलुगू का तुलनात्मक अध्ययन विषय पर गहन अध्ययन किया है।

प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी जीवन परिचय | Biography of Professor Ji Sundar Reddy

हिंदी के विकास और प्रगति में प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी का सराहनीय योगदान है हिंदी के जाने माने लेखक के रूप में प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी ने अनेक ग्रंथों की रचना करके हिंदी भाषा पर अपने अधिकार का प्रमाण दिया है।

प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी के अनेक निबंध हिंदी, अंग्रेजी एवं तेलुगू पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। उन्होंने दक्षिण भारतीयों के लिए हिंदी और उत्तर भारतीयों के लिए दक्षिणी भाषाओं के अध्ययन की प्रेरणा दी। उन्होंने हिंदी भाषियों के लिए तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम साहित्य की रचना की है।

                          Professor Ji Sundar Reddy

इस राष्ट्रवादी हिंदी प्रचारक, प्रख्यात साहित्यकार एवं तुलनात्मक साहित्य के मूर्धन्य समीक्षक प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी ने 30 मार्च 2005 को इस दुनिया को छोड़ दिया।

करर्तियां Professor Ji Sundar Reddy

प्रोफेसर रेड्डी के अब तक निम्न ग्रंथ प्रकाश में आए है-

  • साहित्य और समाज
  • वैचारिकी शोध और बोध
  • मेरे विचार
  • हिंदी और तेलुगू एक तुलनात्मक अध्ययन
  • दक्षिण भारत की भाषाएँ और उनका साहित्य
  • तेलुगू दारुल
  • लैंग्वेज प्रॉब्लम इंडिया

भाषा का स्वरूप Professor Ji Sundar Reddy

प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की भाषा परिमार्जित है। संस्कृत प्रधान शब्दावली का प्रयोग इनकी रचनाओं में हुआ है। कठिन से कठिन विषय को सरल और सुबोध बनाकर प्रस्तुत किया है। व्यावहारिकता की दृष्टि से इन का सुझाव प्रशंसनीय है अंग्रेजी भाषा के शब्दों का प्रयोग भी कहीं कहीं हुआ है।

शैली के विविध रूप

डॉ रेड्डी की शैली के विविध रूप निम्न प्रकार से है –

विचारात्मक शैली

किसी विषय पर विचार प्रस्तुत करते समय इस शैली का प्रयोग हुआ है शादी की भाषा सरल और लघु और दीर्घ दोनों प्रकार के वाक्य लिखे गए हैं। भाषा में विषय अनुकूल परिवर्तन भी दिखाई देता है।

समीक्षात्मक शैली

इस शैली का प्रयोग प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी ने साहित्यिक विषयों का विश्लेषण करते हुए किया है। वह एक सजग समीक्षक हैं जिनके चिन्तन में गंभीरता है। अपने विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करने वाले प्रोफेसर रेड्डी ने इस शैली में संस्कृतनिष्ठ भाषा का प्रयोग किया है तथा उनकी वाक्य रचना आवश्यकता अनुसार छोटे छोटे वाक्यों तथा लंबे वाक्य वाली हो गई है।

गवेषणात्मक शैली

इस शैली का प्रयोग प्रोफेसर जी रेड्डी अपने शोध परक निबंधों में करते दिखाई पड़ते है भाषा विषय के अनुकूल गंभीर परिणाम जीत है जिसमें नवीन एवं मौलिक विचारों को प्रतिबंधित किया गया है।

हिंदी साहित्य में स्थान

प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी ने हिंदी की सेवा करके अहिन्दी भाषी व्यक्तियों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया और भारत की राष्ट्रभाषा के प्रति अपनी कृतियों के माध्यम से अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है। वे एक श्रेष्ठ विचारक कुशल निबंधकार एवं विद्वान समीक्षक के रूप में हिंदी जगत में सम्मानित रहे हैं।

तेलुगु भाषी होते हुए भी प्रोफेसर जी सुंदरानी ने हिंदी भाषा के विकास हेतु अपना जीवन समर्पित कर सभी हिंदी प्रेमियों के प्रेरणा प्रदान की है। निश्चित रूप से उनका योगदान हिंदी जगत में अविस्मरणीय रहेगा।

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