सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व से जुड़े निबंध | Essay on Social and National Importance

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Essay on Social and National Importance

प्रस्तावना : हमारे देश भारत वर्ष की कल्पना, हम होंगे कामयाब, सार्थक हो रही है। प्रतिदिन विकास के पथ पर अग्रसर भारत ने अंतत : 11 और 13 मई, 1998 को पोखरण मैं कर्मस : तीन और दो परमाणु परिश्रम सफलतापूर्वक कर विश्व को आचार्यचकित कर दिया। हमारा देश भारत क्या नहीं कर दिखा सकता है, यह बात भी इस परिक्षण से स्पष्ट हो जाती है। केवल अमेरिका ही नहीं, प्राप्त इसके किसी अनुयायी देश को इसकी भनक न लग सकी।

अमेरिका यह तो कहीं वर्षों से जान रहा था कि भारत के पास परमाणु बम बनाने की तकनीक है, किंतु यह नहीं जानता था कि भारत के परमाणु परीक्षण इस प्रकार हो जाएंगे।। किसी को हवा भी नहीं लग पाई और भारत ने पोखरण विस्फोट सफलतापूर्वक कर परमाणु शक्ति वाले देशों में अपना नाम लिखवा लिया।

सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर निबंध | Essay on Social and National Importance

अमेरिका के पास इस प्रकार के जासूसी उपग्रह हैं जो विश्व की गतिविधियों को अपने नियंत्रण कक्ष मैं शीघ्र प्रेषित कर देते हैं, किंतु वह जासूसी उपग्रह भी भारत के इन परिक्षणों के विषय में कुछ न जान सकें। यह है हमारे भारतवर्ष के बढ़ते कदम, और ,कामयाबी है। यह है संसार के 5 परमाणु शक्ति वाले देशों को अच्छा नहीं लगा।

परमाणु क्लब के पांच देशों ने भारत वर्ष को परमाणु शक्ति देश मानने से इंकार किया। पर गुणात्मत : अमेरिका व अन्य कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अपनी दूषित भावना प्रकट कर दी। इसके उत्तर में पाकिस्तान ने जवाबी कार्यवाही करने के लिए 28 और 30 मई, 1998 को क्रमश : 5 और 1 परमाणु परिक्षण कर दिखाए। किंतु इसका भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

अमेरिका ने मजबूर होकर पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए क्योंकि अमेरिका पाकिस्तान का पक्षधर रहा है।
हमारे देश के परमाणु वैज्ञानिकों ने कुछ क्षणों के अंदर परमाणु विस्फोट परिष्करण कर जो परिणाम प्रस्तुत किए वे सराहनीय हैं। सैनिकों का वेश धारण कर भारतीय वैज्ञानिकों ने जो 45 किलो तन से भी अधिक उर्जा उत्पन्न करने वाले हाइड्रोजन तथा परमाणु बमों ओके परिक्षण कर दिखाए वह कोई साधारण काम नहीं।

सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर निबंध

हमारे इस परमाणु शक्ति संकलन में अनेक बाधाएं आईं। विदेश से तकनीकी सहायता नहीं मिल सकी, यहां तक कि सुपर कंप्यूटर बनाने की तकनीक हम प्राप्त नहीं कर पाए। हमारे वैज्ञानिकों ने इस प्रकार की बाधाओं का डटकर सामना किया और अंतत : वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर 1000 तथा कंप्यूटर 3000 बना ही लिया। इस प्रकार की शक्ति वाले तीन देशों में भारत का नाम सम्मिलित हो गया।

हमारे देश ने जो भी परमाणु ऊर्जा बढ़ाने का प्रयास किया है, वह सामयिक दृष्टि से उचित है। यघपि भारत ने अप्रसार संधि :एनपीटी: और व्यापक परीक्षण निषेध संधि :सीटीबीटी: पर हस्ताक्षर भले ही नहीं किए, किंतु भारत परमाणु अस्त्रों का समर्थक नहीं । इन परमाणु अस्त्रों से यघपि देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है किंतु हम विचलित न होकर और मजबूत हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा अनिवार्य है हमारा देश झूठी शासन में विश्वास नहीं करता, अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्व प्रदान करता है।

अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन अपने परमाणु क्षमता में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं तो भारत को अपनी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं करनी चाहिए। हमारे वैज्ञानिकों को चाहिए कि परमाणु शक्ति के क्षेत्र में निरंतर लगे रहें और नए-नए तकनीक खोज कर और क्षमता को बढ़ाते रहें। आज इस प्रकार की शक्ति का विकास अपने पड़ोसी देश और विश्व के अन्य देशों को देखते हुए बहुत आवश्यक है। पांच परमाणु परीक्षणों के पश्चात भी हमारा देश शांति चाहता है। परमाणु परिक्षण किसी को भय दिखाने के लिए नहीं अपितु अपनी सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से किए गए /

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