किशोरावस्था पर निबंध | Essay on Adolescence

किशोरावस्था पर निबंध | Essay on Adolescence | Kishor Avastha Par Nibandh | Essay on Adolescence | किशोरावस्था की विशेषताएँ | किशोरावस्था की समस्या | Essay on Adolescence

किशोरावस्था पर निबंध | Essay on Adolescence

किशोरावस्था बचपन युवा बनने के बीच की अवस्था है।यह वह अवस्था है जब बच्चे अपने माता-पिता से अलग है स्वतंत्र भी होना चाहते हैं और उन पर निर्भर हुए बिना रह भी नहीं पाते। इसे अवस्था के किशोरों के भीतर एक अलग सा उन्माद होता है, कुछ कर गुजरने का जोश होता है। उनकी नन्ही नन्ही आंखों में सपने होते हैं और उन सपनों को पूर्ण करने हेतु कई योजनाएं बनाई जाती है। इशारों में बच्चे ना पूरी तरह से अबोध होते हैं और ना ही परिपक्व, अपितु यह अवस्था धीरे धीरे प्रवक्ता की ओर अग्रसर होने की होती है।

किशोरावस्था पर निबंध | Essay on Adolescence

किशोरों की दशा

इस अवस्था में बच्चों में शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक सभी स्तरों पर परिवर्तन होते हैं, जिसके कारण में अधिक संवेदनशील होते हैं। इस अवस्था में उन पर अनेक दबाव भी होते हैं दोस्तों के साथ मिलकर रहने काऔ विद्यालय में ठीक से पढ़ने और व्यवहार करने के लिए माता-पिता का तथा शिक्षकों का दबाव। ऐसे में बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी अवस्था में वे अपने व्यक्तिगत पहचान है और उसके लिए प्रयास भी करते हैं।

संभवत: यही कारण है कि प्राय: किशोर समझ नहीं पाते कि वह क्या करें? वह अपनी पहचान बनाने के लिए अपने कपड़े, बालों आदि के साथ तरह-तरह के प्रयोग करते हैं। यहां तक कि अपने आदर्शों और मूल्यों के साथ भी। यह एक सामान्य अवस्था है।

अभिभावकों की भूमिका

किशोरावस्था मैं बच्चों में कई तरह के परिवर्तन आते हैं, उनके मन में कई तरह के प्रश्न होते हैं। समय उनमें कुछ ना कुछ जानने की जिज्ञासा बलवती रहती है ऐसे में माता-पिता का कर्तव्य है कि वह उनसे मित्रता पूर्वक व्यवहार करें। अगर किशोरों के साथ कोई समस्या हो तो अभिभावकों को धैर्य से काम लेना चाहिए। खोलिए बातचीत से समस्या को समझना आसान होता है और फिर उसका हल भी खोजा जा सकता है।

किशोरावस्था कॉल आनंद आया अनुभव बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य जो माता-पिता कर सकते हैं, वह है किशोरों के प्रति अपने स्नेह को प्रदर्शित करना। उनके अच्छे कार्यों को सराहा जाना चाहिए। उन पर इमानदारी, सच्चाई और दूसरों का सम्मान जैसे गुणों का पालन करने के लिए लगता से बल देने के साथ-साथ उनकी अवस्था के अनुसार उन्हें समुचित स्वतंत्रता भी प्रदान की जानी चाहिए।

जब किशोर अपने सीएम आओ और अपने उत्तरदायित्वों को समझेंगे, एक सुरक्षित और सुखद वातावरण में रह गए, तो अपने क्षमताओ को बढ़ाते हुए एक एक स्वस्थ और होनहार युवा बनने से भला उन्हें कौन रोक सकता है। आज के बच्चे भविष्य की नींव है। यदि हम उन्हें आज संभालेंगे, नेखारेगे, तराशगे तो स योग्य नागरिक बनकर एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करेंगे।

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