अपवाह किसे कहते है | Apvah Kise Kehte Hai in Hindi

Apvah | अपवाह | Apvah Kise Kehte Hai | अपवाह किसे कहते है | Apvah Kise Kehte Hai in Hindi | अपवाह कितने प्रकार का होता है | Apvah Kitne Parkar Ka Hota Hai in Hindi | भारत में अपवाह तंत्र

अपवाह | Apvah Kise Kehte Hai

अपवाह शब्द कि क्षेत्र विशेष के नदी तंत्र की व्याख्या करता है। भारत के भौगोलिक विभिन्न दिशाओं से छोटी-छोटी धाराएं एक साथ आकर मिल जाती हैं तथा एक नदी का निर्माण करती हैं, जिसका विकास किसी बडे़ जलाशय, जैसे- समुद्र या झील या किसी महासागर में होता है । किसी नदी तंत्र द्वारा जिसे क्षेत्र का जल प्रवाहित होता है उसे एक अपवाह द्रोणी का जाता है। मानचित्र का अवलोकन कन्या से हमें यह ज्ञात होता है कि कोई भी ऊंचा क्षेत्र, जैसे- पर्वत या ऊंची भूमि जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को एक दूसरे से अलग करती है उसे जल विभाजक कहते हैं।

पता लगाइए

  • मिस्र की नाली नदियां सागर की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी है।

अपवाह किसे कहते है | Apvah Kise Kehte Hai in Hindi

पता लगाइए

  • कौन सी अपवाह द्रोणी भारत की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी है ॽ

भारत में अपवाह तंत्र

भारत में अपवाह तंत्र का नियंत्रण मुख्यताः भू-आकृतियों के माध्यम से होता है। इसके आधार पर हम भारतीय नदियों को दो मुख्य वर्गें में विभाजित कर सकते हैं-

  • हिमालय की नदियां तथा
  • प्रायद्वीपीय नदियां

भारत के दो मुख्य भूगोल के क्षेत्र में उत्पन्न होने के कारण हिमालय एवं प्रायदीपीय नदिया एक दूसरे से अलग है। हिमालय की ज्यादातर नदियां पूरे वर्ष बहने वाली अथवा बारहमासी नदियां होती हैं। जिस में वर्ष भर पानी रहता है, क्योंकि इन्हें बरसो के अलावा ऊंचे पर्वतों से पिघलने वाली बर्फ के दौरान भी जल प्राप्त होता है। हिमालय की दो प्रमुख नदियां ब्राह्मण पुत्र तथा सिंधु इस पर्वत श्रृंखला के उत्तरी भाग से निकलती है, जो पर्वतों को काटकर गंर्जों का निर्माण करती है । यह नदियां अपने उत्पत्ति स्थल से लेकर समुंद्र तक के लंबे मार्ग को तय करती हैं।

ये अपना मार्ग के ऊपरी भागों में बड़े तीव्र अपरदन किया करती हैं तथा अपने साथ भारी मात्रा में बालू एवं सिल्ट को साथ बाह ले जाती है। मध्य एवं निचले भागों में यह नदियां प्रायः विसर्प, गोखुर झील तथा अपने बाढ़ के मैदानों में बहुत से अन्य निक्षेपण स्थलाकृतियों का निर्माण करती हैं । ये पूर्णतः विकसित डेल्टाओं का भी निर्माण करती हैं।

लगभग अधिकतर प्रायद्वीपीय नदिया मौसमी होती है, इसका कारण यह है की इसका प्रवाह वर्षा होने पर निर्भर करता है। शुष्क मौसम में बड़ी-बड़ी नदियों का जल स्तर घटकर छोटे-छोटे धाराओं में विभाजित हो जाता है। हिमालयी नदियों का अपेक्षा प्रायद्वीपीय नदियां लंबाई में कम तथा छिछली है। लेकिन फिर भी इसमें से कुछ केंद्रीय उच्च भूमि से निकलती है एवम् पश्चिम की तरह बहती है। क्या आप ऐसी दो बड़ी नदियों की पहचान कर सकते हैं ? प्रायद्वीपीय भारत में ज्यादातर नदियां पश्चिम घाट से निकलती है तथा इनका प्रवाह बंगाल की खाड़ी की ओर होता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.