समाज निर्माण में दूरदर्शन का योगदान

प्रस्तावना : कवि के उपयुक्त शब्द आज के मानव की कितनी अच्छी तस्वीर पेश करते हैं विज्ञान ने मानव को अनेक उपहारों से उपकृत किया है उसने उसे मनोरंजन के अनेक सदन भी दिए हैं इन सब में रेडियो चलचित्र तथा दूरदर्शन इत्यादि मुख्य हैं मानव को मनोरंजन की बड़ी आवश्यकता पड़ती है जब वह थक जाता है तो उसने पुन: स्फूर्ति तथा उल्लास भरने के लिए मनोरंजन चाहिए

वर्तमान युग में दूरदर्शन परिवार का आवश्यक अंग बन गया है परिवार का कोई भी सदस्य इसे देखे बिना नहीं रह सकता इसके कार्यक्रमों का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है घरों में वे वस्तुएं अधिक खरीदी जाती हैं जिनका विज्ञापन दूरदर्शन पर दिखाया गया हो बच्चे बूढ़े युवा सभी इस के कार्यक्रमों को अत्यंत चाव से देखते हैं इस पर दिखाए जाने वाले नाटकों कहानियां फिल्मों तथा अन्य कार्यक्रमों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है

समाज निर्माण में दूरदर्शन का योगदान
समाज निर्माण में दूरदर्शन का योगदान

दूरदर्शन सभी लोगों के ओके आकर्षण का केंद्र तो बन ही चुका है परोक्ष रूप से यह लोगों के विचारों जीवन दर्शन तथा मानसिकता को भी प्रभावित करता है इस पर दिखाए जाने वाले अनेक फिल्मों के अच्छे बुरे परिणाम समाज में देखे जा सकते हैं जीवन जागृति और जीवन जीने के मार्ग में दूरदर्शन का महत्व यदि वरदान सिद्ध हो सकता है तो कुरुचिपूर्ण दृश्यों से प्राप्त कुसंस्कार रूप में अभिशाप आजकल टी.वी पर जिस प्रकार की फिल्में. चित्रहार आदि प्रदर्शित हो रहे हैं उनसे जीवन मूल्यों की निरंतर कमी हो रही है

आजकल डिश एंटीना तथा केबल टी.वी. के आगमन से विदेशी कार्यक्रमों में हिंसा सेक्स, चुंबन, आलिंगन आदि का प्रदर्शन हमारे युवकों के चारित्रिक पतन का कारण बनता जा रहा है इन कार्यक्रमों में नित्य तथा संगीत के नाम पर नग्नता तथा अंग प्रदर्शन की की अधिकता है इन कार्यक्रमों को परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर नहीं देख सकते
इससे यह है निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए के दूरदर्शन समाज निर्माण में कोई भूमिका नहीं निभाता है दूरदर्शन एक ऐसा सशकत माध्यम है जिसके द्वारा दहेज प्रथा जाति प्रथा सांप्रदायिकता, धर्माधता, आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों को नष्ट किया जा सकता है

दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों के द्वारा लोगों की मानसिकता बदली जा सकती है सामाजिक बुराइयों के प्रति जनमत तैयार करने में दूरदर्शन की भूमिका सर्वेचच है और इसके द्वारा लोगों की मानसिकता बदली जा सकती है सामाजिक बुराइयों के प्रति जनमत तैयार करने में दूरदर्शन की भूमिका सर्वेचच तथा संदिग्ध है रामायण महाभारत हमलोग जैसे अनेक शिक्षाप्रद कार्यक्रमों ने जनमानस को आंदोलित किया है

प्रकृति पर सर्वत्र है, विजयी पुरुष आसीन/

तमस सीरियल ने सांप्रदायिक भावनाओं को झिंझोड़ डाला तथा अनेक कलात्मक_ फिल्मों ने रोढ़यों अंधविश्वासों तथा सामाजिक_ कुरीतियों के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने का सराहनीय कार्य किया दूरदर्शन के कार्यक्रमों द्वारा समाज का स्तर भी ऊंचा उठता है बौद्धिक शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से चिंतन का स्तर विस्तृत हो जाता हैदूरदर्शन स्वयं कुछ नहीं करता उस से प्राप्त होने वाले -लाभ हानि के लिए हम स्वयं उत्तरदायी हैं

यदि इस पर अच्छे कार्यक्रम दिखाए जाएं तो यह एक अभूतपूर्व वरदान सिद्ध हो सकता है समाज में सहिष्णुता, एकता, जागृति, नव-चेतना राष्ट्रीयता, देश- प्रेम तथा जीवन-मूल्यों की वृद्धि करने में सहायक हो सकता है अतः दूरदर्शन के अधिकारियों को इस दिशा में पर पृयतनशील होना चाहिए विदेशों से आय कार्यक्रमों को गुण – दोष तथा भारतीय परिवेश के आधार पर मूल्यांकित करके ही उन्हें प्रसारित करने की अनुमति दी जानी चाहिए

प्रकृति पर सर्वत्र है, विजयी पुरुष आसीन/

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