समाचार- पत्र

मनुष्य समाज अखिल सृष्टि की सर्वोत्कृष्ट करती कहलाने का गौरव प्राप्त करता है। इसका कारण है-उसकी चेतना कथा जिज्ञासु प्रवृत्ति। वह अपने आस पास के वातावरण के प्रति कभी उपेक्षा का भाव नहीं रख सकता। आदिकाल से ही मानो अपने आस- पास तथा दूर के समाचारों और घटनाओं को जानने की उत्सुकता रहा है। समाचार पत्र- के विकास के पीछे भी मानव की यही भावना है।

समाचार पत्र
समाचार पत्र

समाचार -पत्र का साधारण अर्थ है। ऐसा पत्र जिसमें नए-नए समाचार हों। इनमें नित्य की घटित घटनाओं, समस्याओं के समाचारों का उल्लेख रहता है। आज के जीवन में व्यक्ति न केवल अपने देश, अपितु संसार में होने वाले परिवर्तनों तथा घटनाओं के बारे में सचेत रहता है। समाचार- पत्र आज के युग की आवश्यकता बन गया है।

सत्रहवीं शताब्दी में सर्वप्रथम समाचार- पत्र वेनिस इस नगर में प्रकाशित हुआ। तत्पश्चात धीरे-धीरे इसका प्रचार अन्य देशों में भी हो गया। हमारे देश में अंग्रेजी शासन के समय सर्वप्रथम, इंडियन गजट, नामक सरकारी -पत्र निकला था सन 18 सो 35 में जब प्रेस को स्वतंत्रता प्रदान की गई , तो उस समय से देशी भाषाओं मैं भी पत्रों के प्रकाशन की प्रक्रिया का श्रीगणेश हुआ। आज हमारे देश में अनेक समाचार-निकलते हैं।

जिसमें, हिंदुस्तान, हिंदुस्तान टाइम्स, नवभारत टाइम्स, ऑफ इंडिया,, स्टेटसमैन, इंडियन एक्सप्रेस, प्रताप, वीर अर्जुन, पंजाब केसरी, पैट्रियोट, हिंदू जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, आदि प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त, अन्य भाषाओं में भी अनेक समाचार-पत्र निकाले जाते हैं।
समाचार -पत्र आज के युग की ऐसी बहुत बड़ी आवश्यकता है। प्रात : काल जब अखबार वालों की ध्वनि कान में पढ़ती है, मन अखबार पढ़ने को बेचैन हो जाता है।

व्यक्ति और समाज दोनों के लिए समाचार-पत्र अत्यंत उपयोगी है। समाचार- पत्रों से मस्तिष्क की भूख मिटती है। समाचार -पत्रों से ज्ञान की वृद्धि तो होती ही है, उसे पढ़ने से व्यक्ति का मानसिक स्तर भी बढ़ जाता है। उसे इतिहास, भूगोल राजनीति तथा देश -विदेश की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रहती है। यह ज्ञान -प्राप्ति का सबसे सरल, सस्ता तथा उपयोगी साधन है। समाचार -पत्र में राजनीति, शिक्षा, खेलकूद, चलचित्र, बाजार भाव, सरकारी सूचनाएं, विभिन्न प्रकार के विज्ञापन तथा देश- विदेश की घटनाओं का ब्यौरा छपा होता है।

समाचार – के माध्यम से
जनता और सरकार का पारस्परिक संबंध बना रहता है। इन्हीं के द्वारा जनता को सरकारी नीतियों की जानकारी मिलती है और सरकार को जनता के कष्टों की। समाचार -पत्र जनमत निर्माण का अपूर्व साधन हैं। विभिन्न राजनीतिक पार्टियां इसी माध्यम से जनता तक अपनी बात पहुंचाती हैं।

प्रजातंत्र मैं अखबारों का महत्व और भी बढ़ जाता है। समाचार -पत्र ही सरकार की नीतियों की आलोचना करके राष्ट्र-निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जनसाधारण में राष्ट्रीय तथा सामाजिक चेतना जागृत करने का कार्य भी समाचार – पत्रों का है। समाचार- पत्रों के द्वारा ही हम सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सकते हैं। कुछसमाचार – पत्र संकुचित विचारधाराओं से बंधे होने के कारण संप्रदायिक, विदेष, प्रांतीयता, जातीयता आदि विषैले तत्वों का प्रचार करते हैं।

इसे राष्ट्रीय एकता को ठेस पहुंचाती है। कुछ समाचार – पत्र अफवाहें फैलाकर या समाचारों को नमक-मिर्च लगाकर प्रकाशित करके जनभावना को उत्तेजित करते हैं। इसे हिंसा, हड़तालें, सांप्रदायिक दंगे आदि की घटनाएं घटती रही हैं।
उपयुक्त देषों को दूर किया जा सकता है। इसमें संदेह नहीं कि समाचार -पत्र समाज के पृहरि हैं तथा राष्ट्र के उन्नायक हैं।

समाचार -पत्र बौद्धिक युग की अनिवार्यता हैं तथा इससे बढ़कर मनोरंजन, ज्ञानवर्धन तथा युग -चेतना को जगाने वाला कोई अन्य साधन नहीं। समाचार -पत्र के मालिकों तथा संपादकों को अपने पावन कर्तव्य को पूरा करना चाहिए तथा समाचार- पत्रों द्वारा जन – जागरण का बीड़ा उठाना चाहिए।

Leave a Comment

Your email address will not be published.