वनों का संरक्षण और संवर्धन |Conservation and promotion of forests

 

किसी भी देश की समृद्धि में वन अति महत्वपूर्ण होते हैं। वनों का मानव जीवन से गहरा संबंध है। जीने के लिए 1 मैथ में पूर्ण घटक हैं, किंतु सामान्य व्यक्ति इसके महत्व को नहीं समझ पा रहे है जो व्यक्ति वनों में रहते हैं या जिन की जीविका वनों पर आश्रित है वह तो वनों के महत्व को समझते हैं, लेकिन जो लोग वनों में नहीं रह रहे हैं वे तो इन्हें केवल प्राकृतिक शोभा का साधन मानते हैं।

वनों से हम अनेक प्रकार की लकड़ियां प्राप्त करते हैं। यह लकड़ी या व्यापारिक दृष्टि से भी बहुत उपयोगी होती हैं। इनमें साल सागौन देवदार चीड़ शीशम चंदन आबनूस आदि की लकड़ियां मुख्य हैं। इनका प्रयोग फर्नीचर इमारती सामान माचिस रेल के डिब्बे स्लीपर जहाज आदि बनाने के लिए किया जाता है।

वनों का संरक्षण और संवर्धन

वनों से लकड़ी के अतिरिक्त अनेक उपयोगी सहायक वस्तुओं की प्राप्ति होती है जिनका अनेक उधोगों के कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। इनमें गेंद गहद जड़ी बूटियां कत्था लाख चमडा बांस बैंत जानवरों के सींग आदि मुख्य हैं। कागज उधोग चमड़ा उधोग दीयासिलाई उद्योग टिंबर उद्योग औषधि उद्योग आदि में कच्चे माल के रूप में इनका उद्योग किया जाता है।

वन प्रचुर मात्रा में फल देकर मानव का पोषण करते हैं। अनेक ऋषि मुनि और वनवासी कंदमूल फलों से ही अपना जीवन निर्वाह करते हैं। एक अनेक प्रकार की जीवनोपयोगी जड़ी बूटियों का भंडार होते हैं। एक अनेक वन्य पशु पक्षियों का संरक्षण प्रदान करते हैं। वनों से हमें अनेक बहुमूल्य वस्तुएं प्राप्त होती हैं। हाथी दांत कस्तूरी मृग छाल शेर की खाल गैंडे के सींग आदि बहुमूल्य वस्तुएं वनों की ही देन हैं।

वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, इसलिए इन्हें वर्षा का संचालक कहा जाता हैं। वनों से वातावरण का तापक्रम नन्ही और वायु प्रवाह नियंत्रित होता है, जिससे जलवायु में संतुलन बना रहता है। इन वर्षा के जल को सोखकर अपनी जड़ों के द्वारा भूमि के नीचे जल के स्तर को बढ़ाते रहते हैं। वनों के कारण वर्षा का जल मंत्री से प्रवाहित होता है।

Conservation and promotion of forests

अतः भूमि का कटाव कम होता है। वृक्ष स्वयं सौंदर्य के सृष्टि करते हैं। वन सैर सपाटे के लिए रमणीक क्षेत्र प्रस्तुत करते हैं। ग्रीष्मकाल में बहुत बड़ी संख्या में लोग पवृतीय क्षेत्रों की यात्रा करके उसके प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

भारतीय वन संपदा के लिए उत्पन्न समस्याएं_ वन हमारे जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में बहुत उपयोगी हैं|इनमें अपार संपदा पाई जाती हैं, किंतु जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती गई उसके उपयोग के लिए इन वनों को काटा जाने लगा, परिणामस्वरूप अनेक अद्भुत और घने वन आज समाप्त हो गए हैं और हमारी वन संपदा का एक बड़ा भाग नष्ट हो गया है। वन संपदा के इस क्षरण ने व्यक्ति और सरकार को वन संरक्षण की ओर सोचने पर विवश कर दिया है।

यह निश्चित है कि वनों के संरक्षण के बिना मानव जीवन दूभर हो जाएगा। वनों के आसमान, वितरण वनों के पर्याप्त दोहन के लिए परिवहन संबंधी कठिनाइयों, में नगरीकरण से 1 ओवर की समाप्ति ईंधन व इमारती सम्मान के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई ने भारतीय वन संपदा के लिए अनेक समस्याएं उत्पन्न कर दी हैं। वनों के विकास के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास सरकार ने वनों के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए समय-समय पर वनों के संरक्षण और विकास के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार है।

सन 1965 में वन महोत्सव को आयोजन किया गया जिसका मुख्य नारा था_अधिक वृक्ष लगाओ, तभी से यह उत्सव प्रतिवर्ष 1 से 7 जुलाई तक मनाया जाता है। सन 1965 में सरकार ने केंद्रीय वन उपयोग की स्थापना की। जो वनों से संबंधित आंकड़ें और सूचनाएं एकचित्र करके वनों के विकास में लगी लगी हुई संस्थाओं के कार्य में तालमेल बैठता है।

वनों के विकास के लिए देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई, जिससे वनों के संबंध में अनुसंधान किए जाते हैं और 1 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। विभिन्न राज्यों में वन निगमों की रचना की गई है जिससे वनों की अनियंत्रित कटाई को रोका जा सके। निस्संदेह वन हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं, इसलिए वनों का संरक्षण और संवर्धन बहुत आवश्यक है किंतु इसके लिए जनता और सरकार का सहयोग अपेक्षित है। प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में एक बार वृक्ष लगाकर इस और अपना अमूल्य योगदान दे सकता है

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