रामधारी सिंह दिनकर जीवन परिचय | Biography of Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय जीवन की आकांक्षाओं के उत्कृष्ट प्रतिनिधि कवि है। इनकी ,उनकी कविताओं में विद्रोह, राष्ट्रप्रेम। हम न्याय तथा शोषण के प्रति आवाज उठी है राष्ट्रकवि का सम्मान देकर राष्ट्र ने उनके प्रति कृतज्ञता का परिचय दिया है। दिनकर की कविता युग इन समस्याओं को प्रस्तुत करती है।

वे ओज और मधुमेह के कवि के रूप में हिंदी को ने काव्यरचना दे चूके हैं। क्रांतिवीर दिनकर की कविताएं मन को झकझोर देने में समर्थ है।तित्व की श्रेष्ठता का प्रमाण है उनकी कृति उर्वशी परमिला मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार।दिनकर जी सच्चे अर्थों में राष्ट्र कवि कहे जाने योग्य है।

रामधारी सिंह दिनकर जीवन परिचय | Biography of Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह दिनकर जीवन परिचय

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार के मुंगेर जिले में सिमरिया गांव में 30 कौन सन 1908को हुआ। इनके पिता का नाम रवि सिंह एवं माता का नाम मनरूप देवी था बाल्यावस्था में ही इनके पिता का देहांत हो जाने के कारण इनकी माता जी ने इनका पालन किया। मोकामा घाट से हाईस्कूल करके पटना विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की। मोकामा घाट के विश्वविद्यालय में प्रधानाचार्यों में पद पर कार्य किया और फिर उसके बाद सब रजिस्ट्रार के पद पर भी कार्य किया।

ये मुजफ्फरपुर कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे तत्पश्चात व भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और भारत सरकार के हिंदी सलाहकार पद पर भी कार्य किया। ये मुजफ्फरपुर कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे। तत्पश्चात वे भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत सरकार के हिंदी सलाहकार पद पर भी कार्य किया। अनेक वर्षों तक ये राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे। 24 अप्र सन 1974 को इनका देहांत हो गया।

दिनकर प्रारंभ से ही लोगों के प्रति निष्ठावान सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग और जन साधारण के प्रति समर्पित कवि रहे हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए भी उन्होंने स्वदेश प्रेम की रचनाएं की। उर्वशी महाकाव्य पर इनको ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत सरकार ने इनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए इन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया।

रचनाएँ

रामधारी सिंह दिनकर जी ने काफी और गद्य दोनों ही क्षेत्रों में साहित्य का सर्जन किया है।

काव्य रचनाएँ

रेणुका, हूंकार,, रसवंती,, भद्र गीत,कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, नीम के पत्ते, नीलकुसुम, चक्रवाल, बापू, इतिहास के आंसू, सीपी और शंख, नए सुभाषित, आत्म की आंखें, हारे को हरिनाम आदि।

इनकी कविता का चरमोत्कर्ष उर्वशी में दृष्टिगोचर होता है इसमें पूर्व सनातन नर के प्रतीक हैं और वर्षीय सनातन नारी की ओर इनके माध्यम से दिन करने पुरुषार्थ चतुष्टय तय मैं मोक्ष प्राप्ति के विधान को बताया है।

रश्मिरथी प्रबंधकाव्य है जिसमें महाभारत के उपेक्षित पात्रिक कर्ण का। पुन मूल्यांकन किया और उसे गरिमा में पात्र के रूप में अंकित किया है।

दिन करने संस्कृति के चार अध्याय के रूप में एक श्रेष्ठ गद रचना लिखी है।

दिनकर की डायरी भी एक उच्चकोटि की रचना है।

इनके अतिरिक्त भी दिनकर की अनेक रचनाओं में उनका गंभीर चिंतन एवं अध्ययन मनन वक्त हुआ है।

हिंदी साहित्य में स्थान

रामधारी सिंह दिनकर आधुनिक काल के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं उनकी रचनाएं आज कोटि की हैं जो सहृदय एवं विचारशील पाठकों की हृदयम। बद्धी को तृप्त करती है।।। उनकी भाषा में ओज है एवं भावों में आसान भर्ती कराने की क्षमता है। क्रांतिदर्शी कभी हैं तथा मानव मूल्यों के समर्थक हैं। निश्चय ही इस राष्ट्रकवि के उदय पर हिंदी गर्व कर सकती है।

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