मेरी प्रिय पुस्तक

संकेत बिंदु– अपने प्रिय पुस्तक के विषय में परिचय दीजिए तथा यथोचित करण बताते हुए स्पष्ट कीजिए कि क्यों उक्त पुस्तक प्रिय है।
पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती है। उनके अध्ययन से ज्ञान की प्राप्ति के साथ-साथ स्वस्थ मनोरंजन भी होता है तथा मानवीय गुणों का विकास भी। विद्यार्थी होने के नाते मेरी पुस्तकों में रुचि रही है। उनमें से अनेक पुस्तकें मुझे अच्छी लगी है, परंतु जिस पुस्तक ने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया, वह है-गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित्रमानस।

मेरी प्रिय पुस्तक

मेरी प्रिय पुस्तक

इसी पुस्तक ने महात्मा गांधी को रामराज्य स्थापित करने की उच्च भावना जगाई। रामचरितमानस एक ऐसा काव्य है, जिस पर हिंदी का ही नहीं, संपूर्ण मानव-जाति का अधिकार है। यह ग्रंथ धर्म और साहित्य का अपूर्व संगम है। इसी कारण इस ग्रंथ की आत्मा को धार्मिक संत-महात्मा, साहित्यकार तथा शोधकर्ता सभी स्वीकारते हैं। यघपि राम -कथा पर संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनेक सुंदर ग्रंथों की रचना हुई है: पर तुलसी के मानस को काव्य-सैषठव, कथानक-निदान, कल्पना-वैभव एवं संवेदनात्मक पोषणीयता अदितीय है।

मानस की सबसे बड़ी विशेषता है-साधारण जन से लेकर विधान तक इस का गुणगान करते नहीं रखते। किस ग्रंथ में काव्य के तीनों गुण-ओज, प्रसाद तथा माधुर्य विद्वान हैं। सत्यं शिवं और सुंदरं, की प्राप्ति रामचरितमानस में सहज है। रामचरितमानस में प्रत्येक व्यक्ति को कर्तव्यपालन की प्रेरणा दी गई है-पत्नी का पति के प्रति, भाई का भाई के प्रति, पुत्र का माता के प्रति, राजा का प्रजा के प्रति, सेवक का स्वामी के प्रति, देवर का भाभी के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिए-यही इस करते का मूल संदेश है।

मेरा प्रिय ग्रंथ सात कांडों में विभक्त है-बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड किषिकंधा कांडों, लंका कांड तथा उत्तर कांड-जो अपने में आदित्य है। इसकी भाषा अवधी है तथा दोहा और चौपाई में लिखा हुआ है। इसकी भाषा में प्रवाह तथा प्रांजलता है। अलंकारों के स्वाभाविक प्रयोग मैं इसके साहित्यक महत्व को और बढ़ा दिया है। इस ग्रंथ में सभी रसों का परिपाक भी हुआ है।

मानस की एक और प्रमुख विशेषता है-समंवय की भावना। समंवयवादी कवि हैं। तुलसी का युग अनेक विपरीत बाधाओं, अवरोधों, प्रतिकूलों, अंधविश्वासों, पाखंडों, रुग्ण परंपराओं तथा धार्मिक हास का युग था। तुलसी ने निराश, हताश तथा कतर हिंदू जनता को नया परम प्राण, वेग तथा आत्मविश्वास प्रदान किया। किस ग्रंथ में लोक कथा पुराण का, सुगण तथा निर्गुण, कर्म तथा भत्ती का ज्ञान एवं शैव वैष्णव का समन्वय देखने को मिलता है।

तुलसी ने इस ग्रंथ की रचना लगभग 400 वर्ष पूर्व की थी, किंतु आज भी यह ग्रंथ मानव जाति के लिए प्रकाश स्तंभ – बनकर उसका मार्ग – दर्शन कर रहा है। आज के भौतिक सुखों में आंकठ- निमग्न मानव के लिए यह है सचेतक तथा पथ- प्रदर्शक है। तुलसी की यह रचना, बहुजन हिताय व बहुजन सुखाय, पर आधारित है।

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