भारत के द्वीप समूह | Islands of India

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जैसा कि हम देख चुके हैं कि भारत के मुख्य स्थलीय भाग अत्यधिक विशाल है। इसके अलावा भारत में दो दीप समूह भी स्थित है। क्या आप इन दीप समूह की पहचान कर सकते हैं ॽ

भारत के द्वीप समूह

केरल मैं मालाबार तट के पास स्थित लक्ष्यदीप की स्थिति का पता लगाइए । यह दीप समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है। पहले इनको लकादीव, मीनीकाय एवं एमीनदीव के नाम से जाना जाता था। 1973 से इनका नाम लक्ष्यदीप रखा गया। जों 32 वर्ग किलोमीटर के छोटे से क्षेत्र में फैला है। लक्ष्यदीप का प्रशासनिक मुख्यालय कावारत्ती द्वीप है। यहां पर पादप तथा जंतु के बहुत से प्रकार पाए जाते हैं। पिपली द्वीप, जहां मनुष्यों का निवास नहीं है, एक प्रसिद्ध पक्षी-अभयारण्य है।

भारत के द्वीप समूह | Islands of India

प्रवाल

कम समय तक जीवित रहने वाला सूक्षम प्राणी जो कि समूह में रहते हैं प्रवाल पांलिप्स कहलाते हैं। इनका विशाल गर्म छिछले जल में होता है । इनमें से कठोर शैल का सामान पदार्थ निकलता है। प्रवाल रत्राव एवं प्रवाल अस्थियां टीले के रूप में निक्षेफ्ति होती है। जो मुख्यताः तीन प्रकार की होती है- पध्द प्रवाल रोनिका, पपध्द तटीय प्रवाल भित्ति तथा पपपध्द प्रवाल वलय दीप। आस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ़ प्रवाल राधिका का सबसे अच्छा उदाहरण है। प्रवाल वलय दीप गोल अथवा हार्स शू आकार वाले रोधिका होते हैं।

बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण के तरफ पहली दीपों की श्रृंखला मे अंडमान एवं निकोबार द्वीप है। यह दीप समूह आकार में काफी बड़ी संख्या में अधिक तथा बिखरे हुए हैं। इन्हें मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है- उत्तर में अंडमान तथा दक्षिण में निकोबार । ऐसा माना जाता है कि यह दीप समूह समुंद्र में डूबी पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं। देश की सुरक्षा दृष्टि जयदीप समूह बहुत महत्वपूर्ण है। इन दीप समूह पर पाए जाने वाले पादप एवं जंतुओं मैं अत्यधिक विविधता देखने को मिलता है। विषुवत वृत समीप स्थित होने के कारण यहां की जलवायु विषुवतीय है तथा यह स्थान घने जंगलों से आच्छादित है।

क्या आपको पता है ॽ

  • भारत में एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में बैरेन दीप पर स्थित हैं ।

विभिन्न स्थलाकृतिक भू-भागों का विस्तृत विवरण प्रत्येक विभाग की विशेषताएं स्पष्ट करता है परंतु यह भी स्पष्ट है कि ये विभाग प्रायः एक-दूसरे के पूरक हैं और वे देश को प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध बनाते हैं। उदाहरणतया उत्तरी पर्वत जल एवं वनों के प्रमुख स्त्रोत हैं। ये हैं यह उत्तरी मैदान देश के अन्न भंडार है। इनके फलस्वरूप प्राचीन सभ्यताओं के विकास को आधार मिला । इसी प्रकार पठारी भाग खनिजों के भंडार है, जिसने देश में औघागीकरण के क्षेत्र में विशेष भुमिका निभाई है। तटीय क्षेत्र मत्यन पालन तथा पोत संबंधि क्रिया-कलापों के लिए अत्यंन्त उपयुक्त स्थल है। इसी प्रकार देश की अलग-अलग भौतिक आकृतियां भाविष्य में भारत के विकास की अनेक संभावननाओं को बल प्रदान करती हैं।

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