बेकारी / बेरोजगारी की समस्या

प्रस्तावना़:आज के विज्ञान में मानव को अनेक क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्रदान की है। उसने मानव जीवन को लगभग हर क्षेत्र में समृद्ध, समुन्नत तथा सुखी बनाने में कोई कसर नहीं रखी है। मगर उसी विज्ञान ने कुछ ऐसी समस्याओं को जन्म दिया है, जिनका हल निकलना असंभव हो रहा है। लगभग विश्व के प्रत्येक राष्ट्री मैं इन समस्याओं ने अपना पृकोप दिखाया है । ऐसी ही एक समस्या है-बेकारी की समस्या।

भारत में अनेक समस्याएं हैं। बेकारी की समस्या उनमें सबसे विकराल समस्या है। स्वतंत्रता के 59 वर्षों के बाद भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। हमारे देश में कई प्रकार की बेकारी व्याप्त हैं। इनमें शिक्षतों तथा पृशिक्षितों की बेकारी प्रमुख है। दूसरे वर्ग में, अशिक्षित दिया अप्रशिक्षित लोग हैं। तीसरा वर्ग उन व्यक्तियों का है, जो कुछ समय के लिए काम पर लगे हुए हैं, पर कुछ समय पश्चात बेकार हो जाते हैं। उन्हें अद्र्- बेकार भी कहा जा सकता है। चौथे वर्ग में ऐसे लोग हैं, जिन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप काम नहीं मिला और मजबूरी में ऐसा काम करना पड़ रहा है, जिससे वे संतुष्ट नहीं हैं।

बेकारी / बेरोजगारी की समस्या
बेकारी / बेरोजगारी की समस्या

बेकारी की समस्या के लिए सरकारी नीतियां जिम्मेदार हैं। हमारी शिक्षा नीति ने सफेदपोश वर्ग को जन्म दिया है तथा सरकार ने कुटीर उद्योगों की तरफ कम ध्यान दिया है। देश की बढ़ती हुई जनसंख्या भी महत्वपूर्ण है। जनसंख्या की वृद्धि की तुलना में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

भारत के अधिकांश जनता गांव में रहती है। गांव के दस्तकार लोगों ने अपना पैतृक काम छोड़ दिया है। कृषकों के बेटे मामूली कल्की करके अपने दो धन्य समझाने लगे हैं। बड़ी-बड़ी मशीनों तथा कल- कारखानों ने कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया है। बेकारी के कारण देश में अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार तथा आराजकता बढ़ रही है। बेकारी की समस्या हमारे समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। बेकारी के कारण ही आज अनेक युवक चोरी, डाका, हिंसा, उपद्रव आत्महत्या जैसे कुकृतयों मैं सिलगन हो जाते हैं। बेकारी की समस्या इतनी व्यापक है कि इसका समाधान आसान नहीं है। फिर भी सर्वप्रथम शिक्षा का नवीनीकरण बहुत आवश्यक है। शिक्षा को रोजगार के शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए।

बेकारी / बेरोजगारी की समस्या:
बेकारी की समस्या को हल करने में कुटीर उद्योग महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के युवकों को अपने उद्योग खोलने तथा श्रम करने की ओर प्रेरित किया जाना आवश्यक है। यदि बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक नहीं लगाई गई, तो बेकारी की समस्या का कोई भी प्रभावी हल नहीं खोजा जा सकता।

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