डॉ संपूर्णानंद जीवन परिचय | Biography of Docter Sampurnanand

डॉ संपूर्णानंद कौन थे? कहां के रहने वाले थे ? आज हम इन सब के बारे में जानेगे…..

डॉक्टर संपूर्णानंद एक कुशल राजनीतिक,, प्रखर विचारक,, महान शिक्षाविद, एक समर्थक साहित्यकार थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ संपूर्णानंद नई विविध विषयों पर विवेचनात्मक निबंध लिखकर अपने मौलिक विचारों से जनता एवं साहित्य प्रेमियों के नए ढंग से सोचने विचारने का अवसर प्रदान किया। वे जीतने बड़े दार्शनिक थे उतने ही महान चिंतक थे साजिद ने प्रकांड विद्वान थे उतने ही सरल हृदय वाले राजनेता थे।

सम्पूर्ण आनंद जी का जीवन परिचय

डॉ संपूर्णानंद आनंद जी का जन्म 1890 ईसवी में बनारस में एक संभ्रांत कायस्थ परिवार मैं हुआ। आपके पिताश्री विजनन्द धार्मिक प्रवृत्ति के थे जिसका प्रभाव डॉ संपूर्णानंद आनंद जी के जीवन पर भी पड़ा।

डॉ संपूर्णानंद आनंद जी ने क्वींस कॉलेज बनारस से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और इलाहाबाद से एलटी करने के उपरांत अध्यापक के रूप में सर्वप्रथम प्रेम विद्यालय वृंदावन में सेवा प्रारंभ की।

डॉ संपूर्णानंद

कुछ दिनों के उपरान्त डूंगरमल कॉलेज बीकानेर में आप प्रिंसिपल नियुक्त होकर 1921 मैं गांधीजी के साथ आंदोलन में कूद पडे़और नौकरी छोड़कर काशी में ज्ञानमण्डल में काम करनेलगे। आपको स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार जेल यात्रा भी करनी पड़ी।

उन्ही दिनों अपने मर्यादा और टुडे नामक पत्रों का संपादन कार्य भी किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आप उत्तर प्रदेश के गृहमंत्री,शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री रहे तथा 1962मैं राजस्थान के राज्यपाल नियुक्त हुए।

वहाँ से कार्यमुक्त होकर काशी लौट आए और मृत्युपर्यंत काशी विद्यापीठ के कुलपति बने रहे। 10 जनवरी,1969 को आपका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया।

डॉक्टर संपूर्णानंद की कृतियाँ

  • निबंध संग्रह -, चिद्विलास पृथ्वी से सप्तऋषि मण्ड,ज्योति विनोद, अंतरिक्ष यात्रा, भाषा की शक्ति, जीवन और दर्शन
  • केवल धर्म संबंधी रचनाएँ – गणेश, ब्राह्मण, सावधान, पुरुष ,सूक्तं, हिंदू देव परिवार का विकास।
  • राजनीति और इतिहास -, चीन की राज्यक्रांति, मिस्र की राज्यक्रांति, समाजवाद, आर्यों का आदेश,सम्राट हर्षवर्धन,, भारत के देशी राज्य अधूरी क्रांति,
  • संपादन – मर्यादा मासिक पत्र, टुडे अंग्रेजी दैनिक।
  • जीवनी – देश बंधु, चितरंजन दास, महात्मा गाँधी

हिंदी साहित्य सम्मेलन ने इनकी कृति समाजवाद पर इन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया तथा साहित्य वाचस्पति की उपाधि देकर सम्मानित किया गया।

भाषागत विशेषताएँ

संपूर्णानंद की भाषा में विषय के अनुकूल भाषा का प्रयोग हुआ है। दर्शन एवं विवेचनात्मक निबंधों में संस्कृति की तत्सम शब्दावली से युक्त भाषा का प्रयोग वे करते हैं। इसमें गंभीरता है किंतु दुरुहता नहीं है।

सामान्य उनके निबंधों में सरल सहज भाषा का प्रयोग हुआ है जिसमें अंग्रेजी एवं उर्दू के चलते हुए शब्द भी उपलब्ध हो जाते हैं डॉ संपूर्णानंद जी उन्हें शब्द के अर्थ की सही जानकारी थी। यही कारण है कि उनकी भाषा में सटीक शब्द चयन हुआ है।

डॉ संपूर्णानंद आनंद जी की भाषा में प्रयोग मुहावरे नहीं मिलते। एक दो स्थानों पर ही सामान्य मुहावरे यथा धर्म संकट में पढ़ना, गम गलत करना, आदि उपलब्ध होते हैं।

डॉ संपूर्णानंद आनंद जी की भाषा में स्पष्टता एवं सुबोधता का गुण व्याप्त है। दार्शनिक विषयों पर लिखे गए निबंधों में भी विशिष्टता नहीं आई है।

डॉक्टर संपूर्णानंद का हिंदी साहित्य में स्थान

डॉक्टर संपूर्णानंद की ख्याति एक प्रबुद्ध विचारक, शिक्षाविद, राजनीतिक, एवं साहित्यकार के रूप में रही है। उनकी विविध कुतिया उनके विचार शक्ति, पांडित्य का उद्घोष करती है।

कुछ कर दिया तो ऐसी है, जो अपने विषय की अन्यतम करती हूँ में गिनी जाती है। ची विलास एवं समाजवादका नाम इस दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। हिंदी साहित्य में एक प्रबुद्ध मनीषी साहित्यकार के रूप में उनकी सेवाएं चेस मरणीय रहेंगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published.