जीवन में खेल कूद का महत्व |Importance of Sports in life

कालिदास ने ठीक ही कहा है_
सब प्रकार के कर्तव्य पालन का प्रथम साधन शरीर ही है। ग्रीक दर्शनिक प्लेटो ने कहा है
मानव जीवन में अच्छे स्वास्थ्य का महत्व असंदिग्ध है। स्वास्थ्य प्राप्ति के अनेक उपायों में खेल कूद का महत्व किसी से कम नहीं है जीवन तभी पूर्ण होता है, जब उसका सर्वागीण विकास हो। शिक्षा से बुद्धि का विकास होता है, तो खेलों से शरीर का अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए व्यायाम खेलकूद, जिमनास्टिक आदि का सहारा मिल जाता है।

दंड बैठक प्राणायाम योगासन जिमनास्टिक आदि से शरीर की पुष्टि तो हो सकती है, पर इन से भरपूर मनोरंजन नहीं हो सकता है। यह ठीक ही है कि इनसे शरीर स्वस्थस चुस्त तथा फुर्तीला रहता है, मगर यह सभी साधन नीरज हैं। इसके विपरीत दौड़ कूद ,कबड्डी, खो ,खो होकी फुटबॉल क्रिकेट आदि खेलों में व्यायाम के साथ साथ हमारा पूरा मनोरंजन भी होगा। अतः स्वास्थ्य और खेलकूदों का गहरा संबंध है।

इसी करण प्राय : विद्यार्थी व्यायाम की अपेक्षा खेलकूद में भाग लेकर अपना स्वास्थ्य सुधारने को प्रयत्नशील रहते हैं।

जीवन में खेल कूद का महत्व
खेलकूद से बहुत लव हैं। इनसे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है, स्वास्थ्य मनोरंजन भी हमें इन्हीं से प्राप्त होता है। खेलकूद से शरीर चुस्त होता है, बुद्धि का विकास होता है तथा शरीर में रक्त संचार तीव्र होता है। इससे शरीर का संवर्धन होता है।

इनके अतिरिक्त खेलकूद से सहयोग उदारता, मेलजोल तथा अनुशासन की भावना का भी विकास होता है। खेलकूद में भाग लेने पर खिलाड़ियों में आपस में मन मुटाव नहीं आता, अपितु आपस में खेल भावना का विकास होता है। खेलकूद के मैदान में अनुशासन का पाठ सीखा जा सकता है।

Importance of Sports in life
विदेशों में खेलकूद पर अधिक ध्यान दिया जाता है। दुर्भाग्य से भारत में अभी खेलकूद पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसलिए हर खेलकूद में प्राय: हम पीछे रह जाते हैं। एशियाई खेलों के आयोजन के बाद से आशा बंधी थी कि अब हमारे यहां खेलकूद पर अधिक ध्यान दिया जाएगा और सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का प्रयत्न करेगी। इससे हमारे यहां भी खेलकूद का वही स्तर होगा, जो विश्व के अन्य राष्ट्रों में है।

भारत जैसे विकासशील देश के लिए महंगे खेलों की अपेक्षा ऐसे खेल अधिक उपयुक्त होने चाहिए जिनमें खर्च अपेक्षाकृत कुछ कम आता है।आज भारत के हर युवक-युवती का कर्तव्य है कि वह किसी भी प्रकार के किसी न किसी खेलकूद में बाघ अवश्य ले। इससे स्वास्थ्य प्राप्ति के साथ साथ रहे अपने देश का नाम भी उज्जवल कर सकता है।

नवें एशियाई खेलों में स्वर्ण रजत तथा कांस्य पदक जीतने वालों का कितना सम्मान हुआ, यह किसी से छिपा नहीं है, पर हाल में ही संपन्न ओलंपिक खेलों में भारत को किसी खेलकूद में कोई पदक प्राप्त नहीं हुआ। अतः प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है कि वह अपने जीवन में किसी न किसी खेलकूद में श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हो।

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