जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय | Biography of Jaishankar Prasad

जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार द्विवेदी युग की स्थूल और कविता को सूक्ष्म भाव -सौंदर्य, रमणीयता एवं मधुर से परिभ्रमण कर प्रसाद जी ने नव युग का सूत्रपात किया। वे छायावाद के प्रवर्तक, उन्नायक तथा प्रतिनिधि कवि होने के साथ ही युग डैमेज प्रवर्तक नाटककार, निबन्धकार उपन्यासकार एवं कहानीकार के रूप में भी जाने जाते हैं।

जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय | Biography of Jaishankar Prasad

जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय

जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के प्रसिद्ध सुगनी साहू नामक वैश्य परिवार में सन् 1889 मैं हुआ था। इनके पिता का नाम देवी प्रसाद था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा तो ठीक प्रकार हुई परंतु अल्पायु में ही माता पिता का देहांत हो जाने के कारण उसमें बाधा पड़ गई और व्यवसाय तथा परिवार का समस्त उत्तरदायित् जी पर आ गया।परिवार का जिम्मेदारी होते हुए भी श्रेष्ठ साहित्य लिखकर जयशंकर प्रसाद जी ने अनेक अमूल्य रतन हिंदी साहित्य को प्रदान किए। परन्तु प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे रन ग्रस्तत,मुकदमेबाजी, परिजनों की मृत्यु, आधीन है रोगग्रस्त कर दिया और अड़तालीस वर्ष की अल्पायु में ह1937 में इनका निधन हो गया।ही

रचनाएँ

प्रसादजी एक श्रेष्ठ कवि,नाटककार, निबन्धकार और आलोचक थे इनकी प्रमुख रचनाएं इस प्रकार है-

  • काव्य – चित्राधार, लहर, झरना, प्रेम पथिक, आंसू, कमायनी।
  • नाटक– चंद्रगुप्त, चंद्रगुप्त,ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु, राजश्री, विशाख, कल्याणी परिणय, और जनमेजय का नाग यज्ञ,
  • उपन्यास – कंकाल, तितली एवं इरावती।
  • काव्यकला और अन्य निबंध नामक निबंध संग्रह में आपके लिखे निबंध संकलित है।
  • इसके अतिरिक्त आपने 70 कहानियाँ लिख कर हिंदी साहित्य का श्री वृद्धि की है। पुरस्कार, देवरथ, आकाशदीप आपकी प्रसिद्ध कहानियों है।

प्रसाद जी के महाकाव्य कामायनी मैं मन्नू, श्रद्धा और ईडा की कथा है, लेकिन सूक्ष्म रूप से यह कथा मानव-जीवन के अनेक मनोवैज्ञानिक पहलुओं के लिए मानव विकास की कथा हो गई है। इसमें मन्नु मन के, श्रद्धा हृदय की ओर ईडा बुद्धि की प्रतीक है। इच्छा, ज्ञान और क्रिया के सामंजस्य द्वारा ही आनंद की प्राप्ति होती है।

आंसू इनका विवाह काव्य है जिसमें कवि ने युवा जीवन की मादक स्मृतियों को व्यक्त किया है। चित्राधार बृज भाषा में रचित काव्य संग्रह है जबकि लहर मैं भावात्मक कविताएं संकलित है। झरना में प्रसाद जी ने सौंदर्या एवं प्रेम की अनुभूति या वर्णित की है।

हिंदी साहित्य में स्थान

प्रसादजी एक ऐसी विभूति हैं जिसे पाकर कोई भी भाषा और साहित्य स्वयं को। गौरवान्वित समझेगा इनकी कमाई तुलसी के राम चरित मानस के बाद हिंदी साहित्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आचार्य नन्द दुलारे वाजपेयी ने लिखा है – भारत के इन्हें गिनने आधुनिक श्रेष्ठ साहित्यकारों में प्रसाद जी का पद सर्वर ऊंचा रहेगा। उन्होंने प्रबंध काव्य में भी चित्र प्रधान भाषा और लाक्षणिक शैली का सफलतापूर्वक प्रयोग करते हुए अपनी विलक्षण काव्य प्रतिभा का परिचय दिया

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