चलचित्र के गुण दोष/ सिनेमा के दुष्प्रभाव/सिनेमा ज्ञान का स्त्रोत या विनाश का/चलचित्र का चित्र

 

प्रस्तावना़ : निरंतर कार्य करते रहने के कारण मानव जीवन अत्यंत शुष्क तथा निराश हो जाता है उस समय मनुष्य को जरूरत पड़ती है किसी ऐसे साधन की जो उसमें पुन, स्फूर्ति का संचार कर दें तथा उसके थकान मिटा कर उसे पुन, कार्य करने के लिए तैयार कर दें मनोरंजन के विविधा साधन इसी आवश्यकता की पूर्ति करते हैं इसमें चलचित्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है चलचित्र का सर्वप्रथम अविष्कार कोचर महोदय ने सत्रहवीं शताब्दी में किया, पर इनके छायाचित्रों में चलने फिरने और भावों को स्पष्ट करने की शक्ति नहीं थी

सन 1890 में एडिसन ने चलने फिरने वाले छायाचित्रों का निर्माण कर के आधुनिक चित्रपट का श्रीगणेश किया धीरे-धीरे इन छायाचित्रों के माध्यम से मूर्ख अभिनय प्रस्तुत किया जाने लगा यह एक कथानक के रूप में आया, फिर अंत में इसे वाणी भी प्राप्त हो गई भारत में चलचित्र लाने का श्रेय दादा साहब फाल्के को है जिन्होंने सर्वप्रथम भारतीय चित्र आलमआरा बनकर यह है प्रक्रिया प्रारंभ की यह चित्र मूक था फाल्के जी ने ही भारत का सर्वप्रथम सवाक चित्र राजा हरिश्चंद्र का निर्माण भी किया था आज तो भारतीय चित्रपट कहीं से कहीं पहुंच गया है फिल्म निर्माण में विश्व में भारत का दूसरा स्थान है

चलचित्र के गुण दोष
चलचित्र के गुण दोष

चलचित्र का नाम सुनते ही मन में आनंद की एक लहर हिलोरें मारने लगती है सिनेमा आज के युग की अनिवार्यता बन गया है सिनेमा आज मनोरंजन का सर्वश्रेष्ठ साधन है सिनेमा हॉल में 3 घंटे के लिए व्यक्ति अपनी चिंताओं, कुठाओं एवं परेशानियों को भूल जाता है

चलचित्र में संगीत नृत्य कथानक अभिनय रोचक दृश्यों आदि के समावेश होने से यह मनोरंजन का सर्वाधिक प्रभावशाली साधन बन गया है चलचित्र मनोरंजन का साधन होने के साथ-साथ शिक्षा का माध्यम भी है इसके द्वारा इतिहास भूगोल समाज विज्ञान संस्कृति विज्ञान आदि कोवली प्रकार पढ़ाया तथा लिखाया जाता है यह व्यापार का अच्छा साधन है एक और यह है स्वयं उच्चकोटि का व्यापार है तो दूसरी और इसकी सहायता से व्यापारी अपने विज्ञापन देकर अपने व्यापार को विस्तृत करते हैं

संकेत बिंदु _समाचार – पत्रों में पढ़ने को मिलता रहता है

चलचित्रों के द्वारा समाज में व्याप्त विभिन्न कुप्रथाओं को समाप्त करने में सहायता मिलती है जब दर्शक किसी सामाजिक बुराई को चलचित्र में कथानक के माध्यम से देखता है तो उसके हृदय में उस बुराई के प्रति घृणा उत्पन्न हो जाती है राष्ट्रीय सामाजिक तथा संस्कृतिक चेतना जागृत करने में चलचित्रों का विशेष योगदान है अनेक उच्चकोटि की फिल्में मानव मन पर गहरी छाप छोड़ जाती है

चल चित्रों से केवल लाभ ही नहीं होते ,अपितु इसमें हानियां भी होती है अधिक सिनेमा देखने से नेत्रों की ज्योति मंद पड़ने लगती है इसकी लत व्यक्ति का धन और समय बर्बाद करती है तथा अश्लील गंदे एवं रास्ते उत्तेजनापारक चित्रों से चरित्र का हनन होता है आज का युवक उच्छृंखल तथा अनुशासनहीन हो गया है उसका चारित्रिक पतन हो गया है आज सिनेमा देखना एक दुर्व्यसन हो गया है फैशन तथा विलास की भावना बढ़ाने में चलचित्रों की विशेष भूमिका है

उपयुक्त कथन के आधार पर यह निष्कर्ष भी निकालना की चलचित्र स्वरथा दोष युक्त है उचित न होगा यह दोष केवल गंदे चल चित्रों में ही पाए जाते हैं चलचित्र आधुनिक विज्ञान का मानव जाति के लिए एक महान उपहार है आज की मांग है कि छात्रों को अपने देश की सभ्यता संस्कृति एवं गौरवपूर्ण परंपरा के दर्शन चलचित्र के माध्यम से कराए जाएं अच्छे चलचित्रों का निर्माण करके उनके द्वारा उच्च संस्कृतिक सामाजिक तथा नैतिक परंपराएं डाली जाएं सेंसर को भी कठोर रुख अपनाना चाहिए

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