केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय | Biography of Kedarnath Agarwal

केदारनाथ अग्रवाल कौन थे? कहां के रहने वाले थे ? उनके माता-पिता कहां पर रहते थे? आज हम इन सब के बारे में जानेगे…..

प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल का जन्म सन् 1911 ईसवी में ग्राम कमासिन बांदा उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनको प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु इलाहाबाद गए जहाँ से उन्होंने बीए का उपाधि प्राप्त की। इसके बाद विश्वविद्यालय आग्रा से एलएलबी की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा बांदा में वकालत करने लगे। बंदा के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में गहन रुचि के साथ उन्होंने हिंदी के प्रगतिशील आंदोलन में भी बढ़ चढ़कर भाग लिया। केदारनाथ अग्रवाल अपने इंटरमीडिएट के शिक्षक एम कृष्ण श्रीमुख से अति प्रभावित हुए उन्होंने ही अग्रवाल जी की कुछ कविताएं लखनऊ से प्रकाशित होने वाली मधुरी पत्रिका को भेजी कविताएं छपीं। इससे प्रभावित होकर अग्रवाल जी विभिन्न कवि सम्मेलनों में भाग लेने लगे।

केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय | Biography of Kedarnath Agarwal

केदारनाथ अग्रवाल रचनाएँ

विश्वविद्यालय में पहुंचने पर उनका परिचय हरिओम एवं रसाल जैसे उच्च कोटि के कवियों से हुआ नगर में अन्य कवियों के साथ वे उठने बैठने लगे। नींद के बादल उनका प्रथम काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ। इसके बाद युग की गंगा कब प्रकाशन हुआ। लोग तथा आलोक में इनकी प्रगतिशील रचनाएं हैं। इनकी कविताओं में शोषकों के प्रति तीव्र आक्रोश है फूल नहीं रंग बोलते हैं मैं इनकी मर्मस्पर्शी मैं इनकी मर्मस्पर्शी रचनाएं हैं।

प्रगतिशील आन्दोलन को बल प्रदान करने वाले सक्रिय कवियों में से केदारनाथ अग्रवाल प्रमुख हैं। उन्होंने मुक्त छंदों एवं गति छंदों का सफल प्रयोग किया है। इनका शब्द चयन कलात्मक होता है तथा भवभूति यथा सन दोहजार में आपका असमायिक निधन हो गया

अच्छा होता अच्छा होता अगर आदमी आदमी के साथ प्रार्थी-पक्का –और नीयत का सच्चा होता न स्वार्थ का चेहरा बच्चा नो दगेल दांगी और चरित्र का कच्चा होता अच्छा होता अगर आदमी आदमी के लिए दिलदार –और हृदय की थाती होता नई मान का घाती ठगे ठाकुर ना मौत का बाराती होता सितार संगीत की रात आग से उठ बोलते हैं

सितार के बोल खुलती चली जाती है शहद की पुखरिया झूमती उंगलियों के नेतृत्व पर रग पर राग करते हैं किलोल रात के खुले वृक्ष पर चंद्रमा के साथ शताब्दी झांकती है अनंत की खिड़कियों से संगीत के समारोह में को मारिया बरसता है कांस दूध पर तैरता है जिसपर सवार भूमि की सरस्वती काव्यलोक में विचरण करती है कठिन शब्द अर्थ अच्छा होता

यदि आदमी रोगकारी होता, साथ ही इन होता तथा सच्चरित्र होता तो यह बहुत अच्छा होता। यह संदेश यहाँ दिया हुआ है।प्रार्थी- परोपकार, पक्का – मजबूत, चहबच्चा – पानी की होदी, खजाना छिपाने का गड्ढा, दांगी – दाग लगा हुआ।, दिलदार – श हृदय।दिलेर- साहसी। थाती -धरोहर। घाटी-घातक।

सितार संगीत की रात
आग के होंठ -क्रांतिकारी, विनाशक, आग लगानेवाला,।कलोल – उछल कूद क्रीडा, केली, लहर। वृक्ष -छाती। हर्ष का हंस-प्रसन्नता का हंस। अनंत -अंतहीन आकाश।

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