कितना निराला देश हमारा |what a wonderful country ours

जिस भूमि के अन्न जल से मानव का शरीर बनता है, पुष्ट होता है तथा विकास पाता है, उसके प्रति श्रद्धा तथा लगाव अवश्य ही उमड़ पड़ता है। पृतयेक व्यक्ति को अपनी मातृभूमि से अत्यंत प्रेम है।जिस व्यक्ति को अपने देश के प्रति लगाव नहीं होता, मनुष्य नहीं कहा जा सकता। मैथिलीशरण गुप्त ने ठीक ही कहा है_

मेरा महान देश भारत सब देशों का शिरोमणि है। यही वह प्राचीन देश है, जिसने ज्ञान की रश्मियां पूरे विश्व को प्रदान की। जब दुनिया के अन्य देश अभी नग्न अवस्था में ही थे, उस समय हमारा देश पूर्णता को प्राप्त था। मेरे देश का प्राचीन नाम आर्यावर्त था। भारत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा था।मेरे देश के उत्तर में हिमालय पर्वत मुकुट की तरह सुशोभित है। दक्षिण में सागर इस के चरण पखारता है।

कितना निराला देश हमारा

यह है आदिम संस्कृति की क्रीड़ा भूमि थी। ज्ञान विज्ञान धर्म संस्कृति सभ्यता एवं संस्कृति परंपरा के लिए मेरा देश एक प्रकाश स्तंभ था। यहां जो भी आया उसे हम ने अपनाया। विश्व को सत्य अहिंसा शांति त्याग तथा निष्काम कर्म का संदेश मेरे इसी देश ने किया
फुट तथा अकर्मण्यता के कारण सैकड़ों वर्षो तक यह है देश पराधीन रहा। विदेशी आक्रमणताओं ने हम पर सैकड़ों वर्षो तक शासन किया और हमारी जड़ों को खोखला करने की कोशिश की।

महात्मा गांधी की छत्र छाया में भारत वासियों ने एक होकर स्वाधीनता की अहिंसा युक्त लड़ाई लड़ी और अनेक देश भक्त वीरों ने अपनी मातृभूमि की खातिर अपना बलिदान दिया। सन 1857 में झांसी की रानी तांत्या टोपे आदि देशभक्तों ने स्वतंत्रता का जो कठिन और बेमिसाल प्रयास किया था, उसे 15 अगस्त 1947 को पूरा कर लिया गया।

जाते-जाते भारत के दो टुकड़े कर दिए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भारत ने बहुमुखी उन्नति करनी आरंभ कर दी। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश औधोगिक तथा हरित क्रांति की ओर अग्रसर होने लगा है। देश हर दिशा में आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करने लगा। मेरे देश ने प्रजातंत्रीय शासन पधित को अपनाया है। स्वतंत्र भारत में अछूत प्रथा तथा धार्मिक विदेष के लिए कोई स्थान नहीं है। हमारा देश सवप्रभुता संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में है|

स्वाधीन भारत के कुछ समस्याएं न हो ऐसी बात नहीं। इस समय हमारे देश की आबादी 100 करोड़ से भी अधिक पहुंच गई है। जनसंख्या के आधार पर चीन को छोड़कर मेरे देश का विकास में दूसरा स्थान है। मेरे देश की न्यायपालिका स्वतंत्र तथा निष्पक्ष है। आज भी मेरे देश में भाषा धर्म क्षेत्र तथा जाति के आधार पर झगड़े दंगे फसाद आदि होते रहते हैं। मैं बड़ा होकर यह है प्रयास करूंगा कि मेरा देश इन सब से मुक्ति पा सके। हम सभी युवकों का यह पावन कर्तव्य है कि अपने देश की भलाई के लिए मरें।

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