उदयशंकर भट्ट जीवन परिचय | Biography of Uday Shankar Bhatt

उधर शंकर भट्ट का जन्म 3 अगस्त सन् 18 अठानवे को अपने ननिहाल इटावा उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पूर्वज गुजरात के निवासी थे और वहाँ से आकर उत्तर प्रदेश मैं बस गए थे। उनके परिवार का वातावरण साहित्य कौर संस्कृतनिष्ठ था अतः साहित्य अभिरुचि उनमें बचपन से ही उत्पादन हो गई थी। 14 वर्ष की अवस्था में ही उनके माता पिता का देहावसान हो गया था।

उदयशंकर भट्ट जीवन परिचय | Biography of Uday Shankar Bhatt

काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीए, पंजाब से शास्त्री और (कोलकाता तत्कालीन कलकत्ता) से काव्य तीर्थ का परीक्षण तीन की।सन 1913 वीं में ही उनके माता पिता का देहावसान हो गया था। बहुत दिनों तक वे लाहौर में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक रहे तथा स्वतंत्रता आंदोलन में भी आप भाग लेते रहे। देश के विभाजन के बाद वे लाहौर से दिल्ली आ गए और आकाशवाणी के परामर्शदाता और निदेशक रहे। नागपुर एवं जयपुर में रेडियो केंद्रों पर भी उन्होंने सेवा की। सेवानिवृत्त होकर वे कहानी, उपन्यास, आलोचना, एवं नाटक लिखते रहे तथा 22 फरवरी सन् 1966 को उनका निधन हो गया।

उदयशंकर भट्ट रचनाएँ

समस्याओं का अंत, परदे के पीछे, अभिनव एकाकी, अन्त्योदय, चार एकाकी, धूप शिखा, वापसी आदि भट जी के प्रमुख एकांकी है।

उदयशंकर भट्टजी ने कविता, उपन्यास, नाटक और एकांकी लिखे हैं।नाटक और एकांकी के क्षेत्र में उन्हें विशेष ख्याति मिली है। विषय की दृष्टि से उनके एकांकियों को पौराणिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, प्रतीकात्मक, समस्या प्रधान और हास्य व्यंग्यपूर्ण भागों में विभाजित किया जा सकता है। इनमें वैदिक युग से लेकर आज तक कि भारतीय जीवन धारा की संवेदना को चित्रित करने का प्रयास किया गया है।

शिल्प की दृष्टि से भट्टजी के एकांकी रंगमंच और रेडियो दोनों दृष्टियों से सफल है। उन्होंने नाटकीय तकनीक में अनेक प्रयोग भी किए हैं। उनके रेडियो गीतिनाट्य बहुत सफल और लोकप्रिय हुए हैं। साहित्यिक अवदान

उदयशंकर भट्टजी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी एकांकीकार थे। उनकी नाट्यकला युगानुरूप साहित्यिक प्रगति के अनुसार मोड़ लेती रही। उन्होंने रेडियो की दृष्टि से गति-नाट्य प्रयोग किए। उनके गति-नाट्यप्रयोग को भी भारी सफलता मिली। उन्होंने पौराणिक कथाओं के आधार पर भी नाटीय-रचना प्रारंभ की तथा युगानुरूप नवीन मान्यता एवं नाट्य-शैलियों को अपने एकांकियों में सन्निविष्ट किया। उन्होंने पौराणिक एकाकी, हास्यप्रधान एकाकी तथा समस्याप्रधान एकाकी, एकांकी साहित्य को प्रदान किए।

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