आओ हम सब पढ़ें-पढ़ाऍ | Aao Hum Sab Padhe Padhay

आओ हम सब पढ़ें-पढ़ाऍ : भूमिका

भारत सर्वप्रभुतासपन्न, लोकतांत्रात्मक गणराज्य है। प्रजातंत्र या लोकतंत्र की सफलता की आवश्यक शर्तों मैं सर्वप्रथम शर्त यह है कि देश मैं निवासी शिक्षित हों, क्योंकि प्रजातंत्र मैं वास्तविक शक्तियां उसकी जनता में ही निहित होती है। जिस देश में निवासी शिक्षित नहीं होते, उस देश की स्थिति उस भवन के भांति होती है जिसकी नींव कमज़ोर होती है। जिस प्रकार कमज़ोर नींव वाला भवन टिकाऊ नहीं होता, उसी प्रकार ऐसा लोकतंत्र जहां की जनता पूर्णरूपेण शिक्षित नहीं होती, सफल नहीं हो सकता।

आओ हम सब पढ़ें-पढ़ाऍ पर निबंध

शिक्षित निवासियों में ही लोकतंत्र की सफलता निहित

वर्तमान समय मैं शिक्षा का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। अशिक्षित व्यक्ति को न तो कोई नौकरी मिल पाती है तथा न ही वह किसी प्रकार का व्यवसाय शुरू कर पाता है। शिक्षा के अभाव मैं वह बेरोजगार रह जाता है तथा जीवन भर निर्धनता का अभिशाप भोगता रहता है। अशिक्षित व्यक्ति स्वयं तो अनेक प्रकार के अभिशापों मैं ग्रस्त रहता है, साथी अपनी संतान को भी उचित मार्ग-दर्शन नहीं दे पाता।

साक्षर या शिक्षित जनता ने केवल अपने अधिकार एवं कर्तव्यों में प्रति सजग रहती है, बल्कि चुनावों मैं अपने मताधिकार का प्रयोग सोच-समझकर करती है तथा उसके द्वारा उचित प्रतिनिधियों का चुनाव होता है, नीतियों पर चलकर देश उन्नति की ओर अग्रसर होता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रजाताश्रिक माना जाता है, परंतु यह अत्यंत खेद का विषय है कि स्वाधीनता प्राप्त कर लेने के इतने वर्षों में एक-दो राज्यों को छोड़कर कहीं भी शत-प्रतिशत साक्षरता नहीं है। विडंबना तो यह है कि भारत के अनेक राज्यों मैं साक्षरता का प्रतिशत निम्न है, जो भारतीय लोकतंत्र के नाम पर कलंक है।

सरकार तथा समाजसेवी संस्थाओं द्वारा प्रयास

पिछले कुछ वर्षों से अनेक समाजसेवी संस्थाओं तथा सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित हुआ है तथा साक्षरता अभियान को नई दिशा प्राप्त हुई है।अनेक विद्यालयों में छात्रों को भी इस दिशा में प्रेरित किया गया है तथा विद्यालयों, महाविद्यालय द्वारा अनेक कार्य प्रारंभ किए गए हैं। जिनका उद्देश्य है-‘Each one teach one ‘आर्थत प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित बनाना।

प्रौढ़ शिक्षा, रात्रि पाठशाला आदि

आजकल प्रौर्ड शिक्षा के साथ-साथ ऐसे बच्चों को भी शिक्षित किया जा रहा है, जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा पाते। जिन्होंने निर्धनता अथवा साधनों के अभाव में पढ़ना छोड़ दिया है, उनके लिए साधयकालीन, रात्रि कालीन विद्यालयों तथा शिक्षा केंद्रों की व्यवस्था की गई है। ऐसी व्यवस्था में अनेक शिक्षा संस्थाएं तथा सामाजिक संस्थाएं आगे आ रहे हैं।

स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नेतृयाथी भी ऐसे कार्य में सिलगन है।शिक्षा निदेशालय की ओर से भी इस प्रकार की कक्षाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा विद्यालयों को ‘साक्षरता अभियान’

संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय द्वारा निरक्षण प्रौढ़ के लिए पाठ्य पुस्तकों का निर्माण भी किया है, जिओ नि; शुल्क वितरित की जाती है।

साक्षरता अभियान – आओ हम सब पढ़ें-पढ़ाऍ

साक्षरता अभियान एक आयत पवित्र कार्य है, जिसमें प्रत्येक युवा को अपना योगदान देना चाहिए। प्रत्येक युवक युवती को स्वेचछा से इस कार्य के प्रति रुचि दिखानी चाहिए तथा अपने मित्रों को भी इस कार्य में भाग लेने के लिए प्रति सहित करना चाहिए। प्रत्येक पढ़े-लिखे युवक युवतियों को उन अभागे बच्चों की दयनीय स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए, जिन्हें गरीबी तथा अभावों के कारण या तो विद्यालयों में प्रवेश लेने का अवसर ही नहीं मिला और यदि मेरा भी तो बीच में ही छूट गया।

निर्धनता से अभिशप्त ऐसे बच्चों में भी जन्मजात प्रतिभा की कमी नहीं होती। हां, इनकी प्रतिभा को पल्लवित तथा विकसित होने का अवसर नहीं मिलता। जिस प्रकार एक दीपक दूसरे दीपक को रोशन कर देता है, वैसे ही अधिक शिक्षित व्यक्ति केवल एक निरक्षर को पढ़ाने की जिम्मेदारी ले ले, तो भारत की निरक्षरता कुछ ही समय में दूर हो सकती है। हम सभी का कर्त्तव्य है के हम साक्षरता अभियान मैं हर संभव सहायता प्रदान करके भारतवर्ष से निरक्षरता समूल नाश करने का बीड़ा उठाएं और कलंक को सदा के लिए मिटा दें।

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