अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान पहला सुख नीरोगी काया |good health greatboon first happiness healthy body

अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान है। अच्छे स्वास्थ्य से ही अनेक प्रकार के सुख सुविधाएं प्राप्त की जाती हैं। जो व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य तथा स्वस्थ शरीर के महत्व को नकार ता है, वह ईश्वर के इस वरदान का निरादर करता है। वह अपना ही नहीं बल्कि समाज तथा राष्ट्र का कभी अहित करता है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास हो सकता है।

जिस व्यक्ति का शरीर ही स्वस्थ नहीं उसका मस्तिष्क भला कैसे स्वस्थ रह सकता है? स्वस्थ मस्तिष्क के अभाव में व्यतीत कितना पंगु है? इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।
वयायाम और स्वास्थ्य का चोली दमन का संबंध है। व्यायाम से न केवल हमारा शरीर पुष्ट होता है, अपितु व्यक्ति मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहता है। रोगी शरीर में स्वस्थ मन नहीं रह सकता। यदि मन स्वस्थ न हो तो विचार भी स्वस्थ नहीं हो सकते। जब विचार स्वस्थ नहीं होंगे तो कर्म की साधना कैसे अच्छी होगी? फिर कर्तव्यों का पालन कैसे होगा? शरीर को पुष्ट चुस्त एवं बलिष्ठ बनाने के लिए व्यायाम बहुत आवश्यक है।

अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान पहला सुख नीरोगी काया
व्यायाम न करने वाले मनुष्य आलसी तथा अक्रमणय ई बन जाते हैं। अलसी को मनुष्य का सबसे बड़ा सूत्र कहा गया है। आलसी व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में असफल होते हैं। इससे वे निराशा में डूबे रहते हैं। व्यायाम के अभाव में शरीर बोझ सा प्रतीत होता है क्योंकि यह बेडौल होकर तरह तरह के लोगों को निमंत्रण देने लगता है। मोटापा अपने आप में एक बीमारी है, जो हड्डी रोग डायबिटीज (मधुमेह) तनाव तथा रक्त आप जैसे अन्य बीमारियों को जन्म देती हैव्यायाम अनेक प्रकार के हो सकते हैं प्रात: भ्रमण, दौड़ना खेल कूद तेराकी घुड़सवारी दंड बैठक लगाना योगासन आदि प्रमुख व्यायाम हैं।

इनमें प्रात भ्रमण अत्यंत उपयोगी है। जिस प्रकार किसी मशीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसमें तेल आदि डालना अनिवार्य है, उसी प्रकार शरीर में ताजगी तथा गतिशीलता बनाए रखने के लिए प्रात भ्रमण तथा यौगिक क्रियाएं अत्यंत हैं। तेराकी खेलकूद तथा घुड़सवारी भी उत्तम व्यायाम हैं।

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व्यायाम करने से शरीर में रक्त तथा संचार बढ़ता है, बुढ़ापा जल्द आक्रमण नहीं करता शरीर हल्का फुल्का चुस्त तथा गतिशील बना रहता है। शरीर में काम करने की क्षमता बनी रहती है तथा व्यक्ति कर्मठ बनता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम करने वाला होगा, उसका जीवन उतना ही उल्लासपूर्ण तथा सुखी होगा। व्यायाम करने वाला व्यक्ति हंसमुख आत्मविश्वासी, उत्साही तथा निरोगी होता है।

व्यायाम अवस्था के अनुरूप ही करना चाहिए। यह है सभी के लिए उपयोगी नहीं हो सकते। अतः भ्रमण सर्वश्रेष्ठ व्यायाम है क्योंकि प्रात काल यह स्वच्छ वायु का सेवन स्वास्थ्य के लिए ना वरदान है। बच्चों के लिए भागदौड़ बड़े लोगों के लिए भ्रमण तथा युवकों के लिए अन्य व्यायाम उपयोगी हैं। आवश्यकता से अधिक किया गया व्यायाम हानिकारक होता है।

व्यायाम के नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। वयम खुली हवा में तथा खाली पेट करना चाहिए। व्यायाम के तुरंत बाद स्नान भी वर्जित है।
जीवन की सार्थकता अच्छे स्वास्थ्य में ही निहित है। वीर पुरुष ही इस पृथ्वी का भोग करते हैं। यह वीर पुरुष वे ही हैं, जिनका स्वास्थ्य अच्छा है। इस प्रकार नियमित व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने वाला पौष्टिक भोजन है। विद्यार्थी को विशेष रूप से व्यायाम की आदत डालनी चाहिए। यदि हमें धन-धान्य से बड़ी इस पृथ्वी पर व्याप्त अनेक प्रकार के सुखों का उपयोग करना है तथा आत्मविश्वास स्फूर्ति एवं उल्लास से भरा जीवन जीना है, तो हमें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए।

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